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Tuesday, April 7, 2020

वक्त रहते पता चलता तो संक्रमण फैलने में 95% की कमी हो सकती थी; वुहान में लॉकडाउन देर से लगा, तब तक 50 लाख लोग वहां से निकल गए https://ift.tt/3e0vVeT

कोरोनावायरस को लेकर दुनियाभर में एक नई बहस चल रही है। और वो बहस है, इस वायरस को फैलाने का जिम्मेदार कौन है? 100 में से 99 लोग इसके लिए चीन कोजिम्मेदार बता रहे हैं। उसका कारण भी है। लोगों का दावा है कि एक तरफ चीन में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्याघट रही है, तो दूसरी तरफचीन से बाहर इसका संक्रमण बढ़ता जा रहा है। चीन के वुहान शहर से ही कोरोनावायरस से संक्रमण का पहला केस आया था। लेकिन, अब वुहान शहर दोबारा पटरी पर लौट रहा है। वहां कारखाने खुल रहे हैं। लोग काम पर जा रहे हैं। जबकि, दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी अभी भी घर में कैद रहने को मजबूर है।

हाल ही में इजरायल की कंपनी लाइट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था- कोरोना के कहर के बाद चीन और चीनियों के प्रति ट्विटर पर हेट स्पीट 900% तक बढ़ गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ट्विटर पर चाइनीजवायरस, कम्युनिस्टवायरस और कुंगफ्लू जैसे हैशटैग का इस्तेमाल हो रहा है। भास्कर ने कई मीडिया रिपोर्ट्स, रिसर्च और एक्सपर्ट के आधार पर ऐसे कुछ कारण निकाले हैं, जो कोरोना संक्रमण के पीछे चीन का हाथ होने का इशारा करते हैं।

1) कोरोना के बारे में बताने में देरी की
चीन की न्यूज वेबसाइट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने सरकारी दस्तावेजों के हवाले से खुलासा किया था कि हुबेई प्रांत में पिछले साल 17 नवंबर को ही कोरोना का पहला मरीज ट्रेस कर लिया गया था। दिसंबर 2019 तक ही चीन के अधिकारियों ने कोरोनावायरस के 266 मरीजों की पहचान कर ली थी। हालांकि, मेडिकल जर्नल द लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान के एक झिंयिंतान अस्पताल में कोरोनावायरस का पहला कन्फर्म केस 1 दिसंबर को रिपोर्ट किया गया था। इतना ही नहीं, कोरोनावायरस के बारे में सबसे पहले बताने वाले चीनी डॉक्टर ली वेनलियांग को भी चीन की सरकार ने नजरअंदाज किया और उनपर अफवाहें फैलाने का आरोप भी लगाया। बाद में ली की मौत भी कोरोना की वजह से हो गई। चीन ने जनवरी में कोरोनावायरस के बारे में दुनिया को बताया।

इसका नतीजा क्या हुआ : ब्रिटेन की साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर चीन 3 हफ्ते पहले तक कोरोना के बारे में बता देता, तो इससे संक्रमण के फैलने में 95% तक की कमी आ सकती थी।

2) महीनेभर तक नहीं माना- कोरोना इंसान से इंसान में फैलता है
अमेरिकी वेबसाइट नेशनल रिव्यू के मुताबिक, वुहान के दो अस्पतालों के डॉक्टरों में वायरल निमोनिया के लक्षण मिले थे, जिसके बाद 25 दिसंबर 2019 को वहां के डॉक्टरों ने खुद को क्वारैंटाइन कर लिया। लेकिन चीन ने इस वायरस के इंसान से इंसान में फैलने की बात को नकार दिया। 15 जनवरी को जापान में कोरोना का पहला मरीज मिला। वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि मरीज कभी वुहान के सीफूड मार्केट में नहीं गया, लेकिन हो सकता है कि वह किसी कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आया हो। इसके बाद भी चीन ने ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन की बात नहीं मानी। आखिरकार 20 जनवरी को चीन ने माना कि कोरोनावायरस इंसान से इंसान में फैल रही है।

इसका नतीजा क्या हुआ : ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन की बात को नकारने से दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें चालू रहीं। दुनियाभर में लोग एक देश से दूसरे देश आते-जाते रहे। इससे बाकी देशों में भी कोरोनावायरस फैल गया।

3) चीन ने 7 हफ्ते बाद वुहान को लॉकडाउन किया
दिसंबर 2019 में ही चीन में कोरोनावायरस फैलाने लगा था। न्यूयॉर्क टाइम्स में अमेरिकी पत्रकार निकोलस डी. क्रिस्टॉफ ने लिखा था- 'चीन ने वायरस को रोकने की बजाय उन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जो इस वायरस के बारे में चेता रहे थे।' उन्होंने लिखा कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार हमेशा ऐसा ही दिखाती रही कि इस वायरस से डरने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं, वायरस का पहला केस आने के करीब 7 हफ्ते बाद यानी 23 जनवरी को वुहान को लॉकडाउन किया गया।

इसका नतीजा क्या हुआ : लॉकडाउन होने के चार दिन बाद 27 जनवरी को वुहान के मेयर झोऊ शियानवेंग ने बताया था कि लॉकडाउन लगने से पहले ही करीब 50 लाख लोग वुहान छोड़कर चले गए। ये 50 लाख लोग कहां गए, अब तक नहीं पता।

4) कोरोना के बाद भी चीन ने कोई सख्त एक्शन नहीं लिया
अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के डॉ. एंथनी फौसी ने नेशनल रिव्यू को बताया था कि कोरोना की वजह से इटली की इतनी बुरी हालत इस वजह से हुई, क्योंकि इटली में सबसे ज्यादा चीनी पर्यटक आते हैं। उनके अलावा यहां 3 लाख से ज्यादा चीनी लोग काम करते हैं। डॉ. फौसी कहते हैं कि इटली से चीनी लोग नया साल मनाने के लिए चीन आए और फिर वापस इटली लौट गए। चीन में नया साल 25 जनवरी को मनाया गया था। यानी कोरोनावायरस फैलने के बाद भी चीन ने अपने लोगों को वापस इटली जाने से नहीं रोका।

इसका नतीजा क्या हुआ: इटली में चीन से भी ज्यादा कोरोना के मामले आए। 5 अप्रैल तकइटली में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1.28लाख के पार पहुंच गई। यहां साढ़े 15 हजार से ज्यादा मौतें भी हुई हैं, जो कोरोना से किसी भी देश में होने वाली सबसे ज्यादा मौतें हैं।



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Had it been known in time, there could have been a 95% reduction in infection; Lockdown delayed in Wuhan, by then 5 million people left


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